Mahamrityunjay Mantra Jaap करने की क्या है सही विधि और नियम

महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra Jaap) होता क्या है ? देखिए भगवान शिव के बहुत सारे स्वरूप हैं कि कहीं पर वह नटराज हैं कहीं पर वह शिव हैं कहीं प्रभु शंकर है कहीं वह महादेव हैं उसी तरह से भगवान शिव का एक स्वरूप है मृत्युंजय स्वरूप जिसको हम कभी-कभी महामृत्युंजय स्वरूप भी कहते हैं।

जिनकी पूजा से मृत्यु तक को जीता जा सकता है उस स्वरूप को हम मृत्युंजय स्वरूप या महामृत्युंजय स्वरूप कहते हैं तो महामृत्युंजय मंत्र में भगवान शिव के महामृत्युंजय स्वरूप से आयु रक्षा की और सामान्य रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

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इस मंत्र का दीर्घ या लघु स्वरूप यानि बड़ा स्वरूप जप करें या छोटे स्वरूप का जप करें तो आप हमेशा सुरक्षित बने रहेंगे। जब आप महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हैं तो इस मंत्र को जप करने की सावधानियां भी हैं और इस मंत्र को जप करने के नियम भी हैं जिनका पालन करने से यह ज्यादा प्रभावशाली हो जाता है।

Mahamrityunjay Mantra Jaap करने की क्या है सही विधि और नियम

महामृत्युंजय मंत्र सामान्य स्थितियों में आप पढ़ तो सकते हैं लेकिन अगर आपको इसका लाभ चाहिए अगर आपको इसका फायदा चाहिए तो उसको नियमों के हिसाब से आपको पढ़ना चाहिए नियमों के साथ विशेष प्रक्रिया से अगर आप इसको पढेंगे आपको निश्चित रूप से लाभ अवश्य होगा।

Mahamrityunjay Mantra Jaap

कई प्रकार से महामृत्युंजय मंत्र को प्रयोग में लाया जाता है सामान्य तरीके से भी इसका प्रयोग होता है और विशेष रूप से भी महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

कुंडली के कुछ ऐसे दोष होते कि जैसे मारक दशा चल रही हो चंद्रमा का ग्रहण योग हो या चंद्रमा मारक हो ऐसी तमाम स्थितियों में महामृत्युंजय मंत्र ही कारगर होता है और कोई मंत्र बहुत कारगर नहीं होता।

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कुछ स्थितियां-परिस्थितियां ऐसी होती हैं जब आप महामृत्युंजय मंत्र का जप (Mahamrityunjay Mantra Jaap) करके ही अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं और यह मत समझिए कि केवल मृत्यु से रक्षा करने में ही यह मंत्र काम आता है यह मंत्र बहुतसारे और तरीकों से भी जीवन में आपकी रक्षा करता है जीवन की मुश्किलों से आपकी सुरक्षा करता है।

Mahamrityunjay Mantra Jaap

Mahamrityunjay Mantra Jaap कब करना चाहिए ?

महामृत्युंजय मंत्र का जाप आप सुबह भी आप कर सकते हैं और शाम को भी कर सकते हैं सुबह का मतलब 12:00 बजे के पहले और शाम का मतलब सूर्यास्त के बाद दोनों समय आप इस मंत्र का जप कर सकते हैं।

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कष्ट के समय में या संकट के समय में अगर आप चाहे तो इसका जब आप कभी भी कर सकते हैं कोई बड़ा भारी कष्ट आ गया है कि बड़ा भारी संकट आ गया है तब आप उस समय का विचार करने की जरूरत नहीं है आप सुबह शाम के आलावा दोपहर में रातमे जब भी मौका मिले आप इस मंत्र का जप (Mahamrityunjay Mantra Jaap) कर सकते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र जप करेंगे वो शिवलिंग के सामने बैठ करके करेंगे इस या भगवान शिव के चित्र के सामने बैठ करके करिए तो यह ज्यादा प्रभावशाली होगा ज्यादा इफेक्टिव रहेगा और जो मंत्र का जप करेंगे यह रुद्राक्ष की माला से करना ही आपके लिए उत्तम होगा चाहे आप लघु मृत्युंजय मंत्र पढ़ रहे हो चाहे आप महामृत्युंजय मंत्र पढ़ रहे हैं हो इसका जप रुद्राक्ष की माला से करना ही ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

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Mahamrityunjay Mantra Jaap

महामृत्युंजय मंत्र जप करने के पहले अगर आप शिवलिंग पर या भगवान शिव को जल और बेल पत्र अर्पित कर दें तो और भी ज्यादा शुभ होगा यानी सबसे पहले आप शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें फिर शिवलिंग के सामने बैठे और फिर रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र का जप करें और उसके बाद जो आपको प्रार्थना करनी है वह प्रार्थना करिएगा ऐसा करने से निश्चित रूप से इस मंत्र का पूरा-पूरा लाभ आपको हो पायेगा।

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